Thursday, January 8, 2009
राष्ट्रमंडल खेल बड़ी चुनौती : शीला
नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो : मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बुधवार को अधिकारियों के साथ बैठक में साफ किया कि सरकार के लिए राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी बड़ी चुनौती है। इसलिए जरूरी है कि अधिकारी विकास की गति में तेजी लाएं और परिणामजनक दृष्टिकोण अपनाएं। उन्होंने सभी विभागों द्वारा पांच वर्ष की योजना तैयार करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि जो विभाग अपने कार्य में सबसे अधिक सफल होंगे, ऐसे विभागों को प्रतिवर्ष पुरस्कृत भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सभी सचिवों व विभागाध्यक्षों से अपने-अपने विभाग में पांच वर्ष की कार्य योजना बनाने के लिए कहा है जिसकी समीक्षा प्रत्येक वर्ष के अंत में हासिल किए जाने वाले लक्ष्यों के आधार पर होगी। इसके लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एक माह का समय दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों के लिए कई परियोजनाएं है जिन्हें सरकार को पूरा करना है। इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए कुछ अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। खेल संबंधी परियोजनाओं के ढांचागत प्रयास में संलग्न सभी एजेंसियों को विशेष निगरानी व्यवस्था बनानी होगी। उन्होंने कहा कि अधिकारी दिल्ली मेट्रो द्वारा विकसित कार्य संस्कृति को अपनाएं। इसके लिए सरकार को और अधिक संवेदनशील बनना होगा। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई की कि दिल्ली के निकटवर्ती शहरों से राजधानी में आकर बसने वालों की समस्या का हल नहीं निकाल पा रहे है। प्रतिवर्ष दिल्ली में पांच लाख से अधिक लोग आकर बसते है। ऐसे लोगों को मजबूरन तंग बस्तियों में रहना पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि जलापूर्ति पर विशेष ध्यान दें। इसके लिए जरूरी है कि तर्कसंगत जल प्रबंधन नीति को अपनाया जाए। साथ ही जलापूर्ति के आधुनिक तरीके अपनाए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट के दौरान जो धन विभागों को मुहैया कराया जाता है, उसका 75 फीसदी हिस्सा प्रथम तिमाही में ही खर्च होना चाहिए। इससे लाभ यह होगा कि वित्ता वर्ष के अंतिम समय के कुछ माह में धन को खर्च करने की जल्दबाजी नहीं होगी और धन सही दिशा में खर्च हो पाएगा। उन्होंने सभी विभागों से कहा है कि वे अपने लक्ष्य तय करे और उपलब्धियों के मापदंड भी तय करे। बेहतर काम करने वाले विभागों को हर साल मुख्यमंत्री ट्रॉफी दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगले दो वर्ष बेहद महत्वपूर्ण है। इसी दौरान हमें अपनी योजनाओं को मूर्तरूप देना है। मुख्य सचिव राकेश मेहता ने बताया कि प्रशासन को आधुनिक बनाने के लिए समुचित नीति अपनाने की जरूरत है। सरकार ने मंत्रिमंडल के निर्णय लागू करने की समीक्षा करने की व्यवस्था भी बनाई है। पिछले वर्ष मंत्रिमंडल ने 268 फैसले किए जिसमें से 80 प्रतिशत से अधिक पूरी तरह लागू किए गए। अन्य का संबंध केंद्र सरकार की मंजूरी से है। इसके अतिरिक्त कई फैसले ऐसे भी है जो लागू होने की प्रक्रिया में है।
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